मुख्य आरोपी की मौत के कारण वन अफसरों के 7.50 करोड़ गबन की नहीं हुई FIR
भोपाल
उमरिया जिले में पिछले नौ साल में कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से 7.50 करोड़ रुपए से अधिक की राशि की हेराफेरी फर्जी चेक के जरिये की गई है। इस मामले का खुलासा होने के बाद अब वन विभाग किसी पर एफआईआर दर्ज नहीं करा रहा है। शुरुआती जांच में यहां पदस्थ रहे भारतीय वन सेवा के नौ अधिकारी, कर्मचारी कार्यवाही के घेरे में हैं। इनमें से दो अलग-अलग कारणों से सस्पेंड हैं और छह रिटायर हो चुके हैं। शहडोल सर्किल से बाहर पदस्थ वासु कनौजिया पर कार्यवाही करने की बात कही गई है। सरकार इसकी अलग से आडिट नहीं कराएगी।
वन मंत्री विजय शाह द्वारा यह जानकारी विधानसभा में विधायक विजय राघवेंद्र सिंह के सवाल में लिखित जवाब में दी है। मंत्री शाह ने बताया कि उमरिया जिले के अंतर्गत जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन कार्यालय में हेराफेरी कर 7.52 करोड़ रुपए का गबन किया गया है। जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन उमरिया में यह अनियमितता वर्ष 2011-12 से नवम्बर 2020 तक जारी चेक के जरिये की गई है।
वन विभाग द्वारा इस गड़बड़ी के खुलासे के बाद कराई गई जांच में कमलेश कुमार द्विवेदी सहायक ग्रेड-3 तत्कालीन तेन्दूपत्ता कक्ष प्रभारी को मुख्य रूप से जिम्मेदार पाया गया है। साथ ही 9 अधिकारियों के द्वारा नियंत्रण एवं बैंक लेखा मिलान कार्य कराने का अभाव पाया गया। गबन के इस मामले में अब सरकार का तर्क है कि मुख्य जिम्मेदार कमलेश कुमार द्विवेदी की 21 सितम्बर 2020 को मृत्यु हो जाने के कारण उनके विरुद्ध कोई कार्यवाही किया जाना संभव नहीं है। इसके अतिरिक्त जिम्मेदार अधिकारियों में से 1 वन मण्डल अधिकारी आरएस सिकरवार को वन विभाग द्वारा निलंबित किया गया है।
एक अन्य वनमंडलाधिकारी देवांशु शेखर भावसे उत्तर शहडोल वनमंडल में हुई अनियमितता के कारण निलंबित हैं। 6 अधिकारी राकेश पाठक, टीएसचतुर्वेदी, आरपीएस बघेल, एमएल लाडिया, डीएस कनेश एवं एमएस भगदिया सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वासु कन्नौजिया भावसे वर्तमान में शहडोल वृत्त से बाहर उत्पादन वनमंडल मंडला में पदस्थ हैं, जिनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रचलित है। प्राथमिकी दर्ज कराने के संबंध में जिला यूनियन उमरिया द्वारा शासकीय अधिवक्ता से विधिक अभिमत प्राप्त कर प्रकरण में कार्यवाही की जा रही है।
मंत्री ने कहा कि जिला यूनियन के अंकेक्षण का कार्य मध्यप्रदेश सहकारी समिति अधिनियम 1960 की धारा 58 के अंतर्गत किया जाता है। इसलिए स्थानीय निधि लेखा संपरीक्षा के विशेष अंकेक्षण से जांच नहीं कराई जाएगी। सभी जिला यूनियन में बैंक स्टेटमेंट एवं कैशबुक मिलान का कार्य अभियान के रूप में लिया गया है। बताया गया कि जबलपुर संभाग में पदस्थ मुख्य वन संरक्षक वन वृत्त जबलपुर के विरूद्ध कुल दो शिकायतें प्रचलन में है जिसकी जांच अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारी से कराई जा रही है। जबलपुर संभाग में पदस्थ मुख्य वन संरक्षक वन वृत्त जबलपुर को वर्तमान पदस्थापना अवधि में विभाग के द्वारा कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है।

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